निम्देवाड़ा के किसानों ने पेश की मिसाल
बालाघाट जिले में परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नई फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने वाले किसानों की सफलता अब ग्रामीण क्षेत्रों में नई प्रेरणा बन रही है। बालाघाट विकासखंड की ग्राम पंचायत निम्देवाड़ा के प्रगतिशील किसान शिवचरण बघेले और रूपेन्द्र बिसेन ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन एवं उपलब्ध कराए गए उन्नत बीजों से पहली बार ग्रीष्मकालीन तिल की खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
दोनों किसानों ने अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन तिल की फसल लगाई थी, जो अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। फसल की बेहतर वृद्धि और अच्छे उत्पादन की संभावनाओं को देखकर किसान काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि पहली बार किए गए इस प्रयोग से उन्हें अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में वे तिल की खेती का रकबा और बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीष्मकालीन तिल कम लागत और कम पानी में तैयार होने वाली लाभकारी तिलहनी फसल है। बाजार में तिल की अच्छी मांग होने के कारण किसानों को इसके बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है। यही वजह है कि अब जिले में किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ तिल जैसी नकदी फसलों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।
मंगलवार 16 जून को कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के खेतों का निरीक्षण कर फसल की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने फसल कटाई, भंडारण एवं विपणन संबंधी आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान करते हुए किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कृषि विभाग का मानना है कि शिवचरण बघेले और रूपेन्द्र बिसेन की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक साबित होगी। यदि किसान आधुनिक तकनीकों और विभागीय मार्गदर्शन का लाभ लेकर फसल विविधीकरण अपनाएं, तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकते हैं।
निम्देवाड़ा के इन किसानों की सफलता यह साबित करती है कि नई सोच, वैज्ञानिक खेती और विभागीय सहयोग के साथ कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।







