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‘हिंदू-मुसलमान नहीं, भारतीय बचपन खतरे में’: छात्र आंदोलन पर बोले बाबा रामदेव, वंदे मातरम विवाद पर कही ये बात

बाबा रामदेव ने धार्मिक विवादों और राजनीतिक बहस के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देने की बात कही। देश में किसी धर्म या जाति को खतरे में बताने के बजाय भारतीय बच्चों और युवाओं की स्थिति पर विचार करना चाहिए।

 

योग गुरु बाबा रामदेव ने रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान देश की मौजूदा परिस्थितियों पर अपनी बात कही। उन्होंने धार्मिक विवादों और राजनीतिक बहस के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देने की बात कही। बाबा रामदेव ने कहा कि देश में किसी धर्म या जाति को खतरे में बताने के बजाय भारतीय बच्चों और युवाओं की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, क्षत्रिय या ब्राह्मण किसी को खतरा नहीं है, खतरे में भारतीय बचपन है। धर्म से ज्यादा शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य की चिंता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बच्चों और युवाओं को आंदोलनों ले जाया जाता है। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन संविधान और जनहित के मुद्दों के लिए होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण चिंता का विषय है। सरकारी व्यवस्थाओं का लाभ लेने वाले लोगों को भी इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

सिर्फ प्रधानमंत्री के भरोसे व्यवस्था नहीं सुधरेगी
रामदेव ने देश की व्यवस्था को लेकर कहा कि केवल प्रधानमंत्री के भरोसे पूरे देश को बदलने की उम्मीद करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से हुए कुछ सकारात्मक बदलावों का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि देश में सब कुछ ठीक है, ऐसा मानना भी सही नहीं होगा।
धर्मांतरण और धार्मिक विवाद पर भी रखी बात
उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि सनातन संस्कृति में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन समाज में मौजूद ऊंच-नीच और भेदभाव की मानसिकता को सुधारने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में ईसाइयों के उत्पीड़न के आरोपों को उन्होंने राजनीतिक विवाद बताते हुए कहा कि किसी भी धर्म के व्यक्ति को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

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