आत्मसमर्पित ही नहीं जेल में बंद नक्सलियों को भी छत्तीसगढ़ सरकार पुनर्वास देने की तैयारी में है। कई साल से जेल में बंद करीब 3000 नक्सली सजा काट रहे हैं। इन पर अलग-अलग तरीके के जुर्म दर्ज है। झीरम कांड से लेकर बड़ी घटनाओं में शामिल नक्सली भी जेल में हैं। जिनका आचरण अच्छा है, उनके अपराध माफ कर मूल धारा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा।
इसके अलावा 2512 आत्मसमर्पित नक्सलियों में भी जिन पर अपराध दर्ज है, उनके केस समाप्त होंगे। बता दें कि अभी आत्मसमर्पित नक्सली बस्तर के सात जिलों में चल रहे पुनर्वास केंद्रों में रह रहे हैं। जेल से निकलने वाले नक्सलियों को भी पहले पुनर्वास केंद्र में ही रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन ने अपराध वापस लेने के लिए मंत्रिपरिषद की उपसमिति का गठन भी कर दिया है। यह समिति ही तय करेगी किसका अपराध वापस लिया जाए और किसका नहीं। इसके बाद कैबिनेट में फैसला लेकर इन्हें अपराध मुक्त किया जाएगा।
6 माह का देखा जाएगा चाल-चलन
नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 में यह दर्ज है कि-”आत्मसमर्पित नक्सली के विरूद्ध यदि पूर्व में आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध हो, तो उनके द्वारा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखते हुए आपराधिक प्रकरणों को समाप्त करने पर शासन विचार कर सकेगी। आत्मसमर्पित नक्सली के 6 माह तक चाल चलन को देखा जाएगा। देखने के बाद अच्छे आचरण सिद्ध होने पर ही शासन द्वारा गठित मंत्रिपरिषद की उप समिति इस पर विचार करेगी। इसी के तहत यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
यह है प्रकरण वापसी की प्रक्रिया
- कलेक्टर, एसपी और जिले के अभियोजन अधिकारी की समिति आत्मसमर्पित नक्सलियों के प्रकरणों का विवरण/सूची पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे।
- पुलिस मुख्यालय के परीक्षण के बाद गृह विभाग के अनुमोदन पर मंत्रिपरिषद की उप समिति के समक्ष इन प्रकरणों को प्रस्तुत किया जाएगा।
- उप समिति से अनुशंसा के बाद मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त होगा।
- केन्द्रीय अधिनियमों के तहत दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए गृह विभाग मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के बाद केन्द्र शासन से पत्राचार कर सहमति लेगा।
- प्रकरण वापसी की कार्यवाही के लिए जिला दण्डाधिकारी को वापसी संबंधी कार्यवाही लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से करना होगा।
ऐसे मामलों में केंद्र से लेनी होगी अनुमति नियम है कि यदि अपराध केन्द्रीय अधिनियम (यूएपीए) के तहत या केन्द्र सरकार की सम्पत्ति या सेवक के विरूद्ध किया गया है तब केन्द्र शासन की सहमति आवश्यक है। चूंकि बस्तर में कई मामले में केंद्रीय बल पर हमला किया गया है। उनके हथियार लूटने के केस दर्ज किए गए हैं। ऐसे मामलों में कैबिनेट के फैसले के बाद भी केंद्र से अनुमति लेनी होगी। यदि केंद्र किसी मामले में हस्तक्षेप करता है तो उसके प्रकरण की वापसी नहीं हो पाएगी।
मंत्रियों की उपसमिति में ये सदस्य
- विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री- अध्यक्ष
- केदार कश्यप, संसदीय कार्य मंत्री- सदस्य
- लक्ष्मी राजवाड़, महिला बाल विकास मंत्री-सदस्य
- गजेंद्र यादव, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री-सदस्य
- अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव गृह विभाग व विधि विधायी कार्य विभाग- सह संयोजक
दो भागों में बांटे गए हैं अपराध
जिला स्तरीय समिति ने आपराधिक प्रकरणों को दो भागों में बांटा है। पहला- सामान्य अपराध यानी ऐसे अपराध जो सात वर्ष से कम के कारावास से दण्डनीय हो, दूसरा-गंभीर अपराध यानी ऐसे अपराध जो मृत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक के लिए दण्डनीय हों।
पहले वाले के लिए आत्मसमर्पण के दिन से 6 महीने तक का आचरण देखा जाएगा। जबकि दूसरे वालों के लिए 3 साल के आचरण को देखकर विचार किया जाएगा।
पुनर्वास का मतलब पूर्ण पुनर्वास
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिए लक्ष्य 31 मार्च को पूर्ण करने के लिए पूरी सरकार प्रतिबद्ध है। पुनर्वास का मतलब पूर्ण पुनर्वास है । जंगल से, जेल से, अपराध से, समाज में पुनर्वास और इसके लिए सरकार ने यह सारी प्रक्रिया प्रारंभ की है। –विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री



