छत्तीसगढ़ पुलिस का डायल-112 प्रोजेक्ट, जो एक समय आपातकालीन सेवा का गौरव था, आज भ्रष्टाचार, पक्षपात और लापरवाही का पर्याय बन गया है। हाल ही में जारी RFP (PHQ/TS/Dial-112/317/2025) और क्लैरिफिकेशन कॉरिजेंडम-1 ने एक बड़े भ्रस्टाचार की ओर इशारा कर रही है, जहां बिना सख्त शर्तों के किसी भी ट्रांसपोर्टर, सोसाइटी या ट्रस्ट को 400 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल्स (ERVs) और 60 हाईवे पेट्रोल वाहनों के 500 करोड़ के ठेके की दावेदारी का रास्ता खोल दिया गया है। प्री-बिड मीटिंग में बिडर्स की गंभीर आपत्तियों—30 दिनों की इम्प्लीमेंटेशन अवधि, पुरानी गाड़ियों की हालत, ड्राइवर वेरिफिकेशन—पर विभाग का जवाब मात्र ‘As per RFP’ रहा। क्या यह मौन किसी खास ‘सोसाइटी फर्म’ को फायदा पहुंचाने की साजिश है?
RFP दस्तावेज (GeM पोर्टल पर उपलब्ध) में 30 दिनों की इम्प्लीमेंटेशन और 5 साल की O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी है, लेकिन चौंकाने वाली बात—कोई सख्त अनुभव मानदंड नहीं! सिर्फ 100 करोड़ का औसत टर्नओवर और नॉन-ब्लैकलिस्टिंग ही शर्त है, चाहे वह ट्रांसपोर्टर कभी इमरजेंसी फ्लीट न चला हो। लिमिटेड कंपनियों के साथ सोसाइटी, ट्रस्ट या रजिस्टर्ड पार्टनरशिप भी बोली लगा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है, यह क्लॉज खासतौर पर ‘सोसाइटी फर्म्स’ के लिए बनाया गया है, जो सरकारी टेंडरों में अनुभवहीनता की आड़ में घुसपैठ कर टेंडर लेना चाहती हैं। पूर्व में जहां 2021 में मध्य प्रदेश के डायल-100 प्रोजेक्ट में एबीपी कंपनी के फर्जी सर्टिफिकेट से 600 करोड़ का ठेका हथियाने का मामला सामने आया, और छत्तीसगढ़ में महतारी एक्सप्रेस प्रोजेक्ट में भी इसी कंपनी का नाम उछला। क्या डायल-112 का यह टेंडर उसी साजिश का विस्तार है?
प्री-बिड में बिडर्स ने 30 दिनों की अवधि को 60 दिनों तक बढ़ाने, वाहन की हालत चेक करने, ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन और तैनाती में देरी का हवाला दिया। साथ ही, 60 हाईवे पेट्रोल वाहनों की उम्र, मॉडल (बोलरो या अन्य), सर्विस लॉग और वारंटी डिटेल्स मांगी गईं। लेकिन कॉरिजेंडम-1 में विभाग का जवाब—कोई बदलाव नहीं! सूत्रों के अनुसार 100 से ज्यादा मौजूदा वाहन खराब पड़े हैं, और चालक कमी से रिस्पॉंस टाइम बढ़ रहा है। क्या यह अनदेखी जानबूझकर की जा रही है ताकि अनुभवहीन सोसाइटी फर्म्स सस्ती बोली लगाकर ठेका हथिया लें?
L1 मॉडल और गुणवत्ता की बलि: भ्रष्टाचार की बू
टेंडर का चयन ‘लोएस्ट बिड’ (L1) मॉडल पर आधारित है, जहां गुणवत्ता का वजन शून्य है। 2024 में जिकित्जा कंपनी को विवादित मानकर टेंडर रद्द हुआ, और टाटा के बाद प्रोजेक्ट लटका। क्या अब सोसाइटी फर्म्स के लिए ढीले क्लॉज उसी खेल का हिस्सा हैं?
पुरानी गाड़ियों का रहस्य और लागत का बोझ
60 हाईवे पेट्रोल वाहनों की उम्र, हालत और मेंटेनेंस रिकॉर्ड पर पर्दा डाला गया है। विभाग का कहना है—बिडर सिर्फ ड्राइवर देगा, बीमा और मेंटेनेंस का खर्च उसका! लेकिन इन वाहनों की सर्विस हिस्ट्री या वारंटी डिटेल्स देने से इनकार कर दिया गया। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार , पिछले साल 112 वाहनों में से 100 से ज्यादा खराब पड़े थे, और चालक कमी से रिस्पॉन्स में देरी हुई। क्या यह जानबूझकर किया जा रहा है ताकि ‘फेवरेट फर्म्स’ बाद में मेंटेनेंस के नाम पर मुनाफा कमा सकें?
कबाड़ में तब्दील हो रही है nyi गाड़ियां
2023 में खरीदी गई 400 गाड़ियां अब रखे – रखे कबाड़ में तब्दील नहो रही है, क्योंकि बीते 2 साल से टेंडर प्रक्रिया ठप रही। अब नया टेंडर— यह फिर वही कहानी दोहराएगा? सिविल सोसाइटी ने पुलिस मुख्यालय और मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी: “तुरंत क्लॉज सख्त करें—इम्प्लीमेंटेशन अवधि 60 दिन, वाहन डिटेल्स सार्वजनिक, QCBS लागू करें, अनुभवहीन सोसाइटी फर्म्स को बाहर करें।” GeM पोर्टल पर बिड डेडलाइन (अक्टूबर अंत) नजदीक है, लेकिन विभाग और सरकार की चुप्पी चिंता बढ़ा रही है।



